तुम्हारा कल्याण हो, अब तुम समस्त प्राणियोंको सुख देनेके लिये तप करो। फिर उस तपके प्रभावसे ही तुम पूर्ववत् इस संसारकी रचना करना॥ १८॥
तप आतिष्ठ भद्रं ते सर्वभूतसुखावहम्।
तपसैव यथापूर्वं स्रष्टा विश्वमिदं भवान्॥ १८
तुम्हारा कल्याण हो, अब तुम समस्त प्राणियोंको सुख देनेके लिये तप करो। फिर उस तपके प्रभावसे ही तुम पूर्ववत् इस संसारकी रचना करना॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 288) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/18/