फिर उनके दायें स्तनसे धर्म उत्पन्न हुआ, जिसकी पत्नी मूर्तिसे स्वयं नारायण अवतीर्ण हुए तथा उनकी पीठसे अधर्मका जन्म हुआ और उससे संसारको भयभीत करनेवाला मृत्यु उत्पन्न हुआ॥ २५॥✎ 25013041305
धर्मः स्तनाद्दक्षिणतो यत्र नारायणः स्वयम्।
अधर्मः पृष्ठतो यस्मान्मृत्युर्लोकभयङ्करः॥ २५
फिर उनके दायें स्तनसे धर्म उत्पन्न हुआ, जिसकी पत्नी मूर्तिसे स्वयं नारायण अवतीर्ण हुए तथा उनकी पीठसे अधर्मका जन्म हुआ और उससे संसारको भयभीत करनेवाला मृत्यु उत्पन्न हुआ॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 288) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)