इस बार ब्रह्माजीने सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार—ये चार निवृत्तिपरायण ऊर्ध्वरेता मुनि उत्पन्न किये॥ ४॥✎ 1590
सनकं च सनन्दं च सनातनमथात्मभूः।
सनत्कुमारं च मुनीन्निष्क्रियानूर्ध्वरेतसः॥ ४
इस बार ब्रह्माजीने सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार—ये चार निवृत्तिपरायण ऊर्ध्वरेता मुनि उत्पन्न किये॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 287) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)