॥ श्रीहरिः ॥
विद्या दानं तपः सत्यं धर्मस्येति पदानि च।
आश्रमांश्च यथासंख्यमसृजत्सह वृत्तिभिः॥ ४१
vidyā dānaṃ tapaḥ satyaṃ dharmasyeti padāni ca|
āśramāṃśca yathāsaṃkhyamasṛjatsaha vṛttibhiḥ|| 41
अर्थ
विद्या, दान, तप और सत्य—ये धर्मके चार पाद और वृत्तियोंके सहित चार आश्रम भी इसी क्रमसे प्रकट हुए॥ ४१॥
विद्या दानं तपः सत्यं धर्मस्येति पदानि च।
आश्रमांश्च यथासंख्यमसृजत्सह वृत्तिभिः॥ ४१
विद्या, दान, तप और सत्य—ये धर्मके चार पाद और वृत्तियोंके सहित चार आश्रम भी इसी क्रमसे प्रकट हुए॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 290) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/41/