श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.13.17

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

सृजतो मे क्षितिर्वार्भिः प्लाव्यमाना रसां गता।

अथात्र किमनुष्ठेयमस्माभिः सर्गयोजितैः।

यस्याहं हृदयादासं स ईशो विदधातु मे॥ १७

sṛjato me kṣitirvārbhiḥ plāvyamānā rasāṃ gatā|

athātra kimanuṣṭheyamasmābhiḥ sargayojitaiḥ|

yasyāhaṃ hṛdayādāsaṃ sa īśo vidadhātu me|| 17

अर्थ

जिस समय मैं लोकरचनामें लगा हुआ था, उस समय पृथ्वी जलमें डूब जानेसे रसातलको चली गयी। हमलोग सृष्टिकार्यमें नियुक्त हैं, अतः इसके लिये हमें क्या करना चाहिये? अब तो, जिनके संकल्पमात्रसे मेरा जन्म हुआ है, वे सर्वशक्तिमान् श्रीहरि ही मेरा यह काम पूरा करें’॥ १७॥

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