‘भगवन्! एकमात्र आप ही समस्त जीवोंके जन्मदाता और जीविका प्रदान करनेवाले पिता हैं। तथापि हम आपकी सन्तान ऐसा कौन-सा कर्म करें, जिससे आपकी सेवा बन सके?॥ ७॥
त्वमेकः सर्वभूतानां जन्मकृद् वृत्तिदः पिता।
अथापि नः प्रजानां ते शुश्रूषा केन वा भवेत्॥ ७
‘भगवन्! एकमात्र आप ही समस्त जीवोंके जन्मदाता और जीविका प्रदान करनेवाले पिता हैं। तथापि हम आपकी सन्तान ऐसा कौन-सा कर्म करें, जिससे आपकी सेवा बन सके?॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 293) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/13/7/