जिनके गर्भसे आप-जैसा पति पुत्ररूपसे उत्पन्न होता है, वे ही स्त्रियाँ अपने पतियोंसे सम्मानिता समझी जाती हैं। उनका सुयश संसारमें सर्वत्र फैल जाता है॥ ११॥✎ 258
भर्तर्याप्तोरुमानानां लोकानाविशते यशः।
पतिर्भवद्विधो यासां प्रजया ननु जायते॥ ११
जिनके गर्भसे आप-जैसा पति पुत्ररूपसे उत्पन्न होता है, वे ही स्त्रियाँ अपने पतियोंसे सम्मानिता समझी जाती हैं। उनका सुयश संसारमें सर्वत्र फैल जाता है॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 299) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/14/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#258 शब्दोंके बीचका स्थान: जैसेकेलेके → जैसे केलेके