श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.16

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

एष तेऽहं विधास्यामि प्रियं भीरु यदिच्छसि।

तस्याः कामं न कः कुर्यात्सिद्धिस्त्रैवर्गिकी यतः॥ १६

eṣa te'haṃ vidhāsyāmi priyaṃ bhīru yadicchasi|

tasyāḥ kāmaṃ na kaḥ kuryātsiddhistraivargikī yataḥ|| 16

अर्थ

‘भीरु! तुम्हारी इच्छाके अनुसार मैं अभी-अभी तुम्हारा प्रिय अवश्य करूँगा। भला, जिसके द्वारा अर्थ, धर्म और काम—तीनोंकी सिद्धि होती है, अपनी ऐसी पत्नीकी कामना कौन पूर्ण नहीं करेगा?॥ १६॥

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