॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.14.16
एष तेऽहं विधास्यामि प्रियं भीरु यदिच्छसि।
तस्याः कामं न कः कुर्यात्सिद्धिस्त्रैवर्गिकी यतः॥ १६
eṣa te'haṃ vidhāsyāmi priyaṃ bhīru yadicchasi|
tasyāḥ kāmaṃ na kaḥ kuryātsiddhistraivargikī yataḥ|| 16
अर्थ
‘भीरु! तुम्हारी इच्छाके अनुसार मैं अभी-अभी तुम्हारा प्रिय अवश्य करूँगा। भला, जिसके द्वारा अर्थ, धर्म और काम—तीनोंकी सिद्धि होती है, अपनी ऐसी पत्नीकी कामना कौन पूर्ण नहीं करेगा?॥ १६॥