श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.33

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

दितिरुवाच

मा मे गर्भमिमं ब्रह्मन् भूतानामृषभो वधीत्।

रुद्रः पतिर्हि भूतानां यस्याकरवमंहसम्॥ ३३

mā me garbhamimaṃ brahman bhūtānāmṛṣabho vadhīt|

rudraḥ patirhi bhūtānāṃ yasyākaravamaṃhasam|| 33

अर्थ

दिति बोलीं—ब्रह्मन्! भगवान् रुद्र भूतोंके स्वामी हैं, मैंने उनका अपराध किया है; किन्तु वे भूतश्रेष्ठ मेरे इस गर्भको नष्ट न करें॥ ३३॥✎ 259

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #259 शब्दोंके बीचका स्थान: भूतोंकेस्वामी → भूतोंके स्वामी

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