दिति! वह बालक बड़ा ही भगवद्भक्त, उदारहृदय, प्रभावशाली और महान् पुरुषोंका भी पूज्य होगा तथा प्रौढ़ भक्तिभावसे विशुद्ध और भावान्वित हुए अन्तःकरणमें श्रीभगवान्को स्थापित करके देहाभिमानको त्याग देगा॥ ४७॥✎ 260
स वै महाभागवतो महात्मा
महानुभावो महतां महिष्ठः।
प्रवृद्धभक्त्या ह्यनुभाविताशये
निवेश्य वैकुण्ठमिमं विहास्यति॥ ४७
दिति! वह बालक बड़ा ही भगवद्भक्त, उदारहृदय, प्रभावशाली और महान् पुरुषोंका भी पूज्य होगा तथा प्रौढ़ भक्तिभावसे विशुद्ध और भावान्वित हुए अन्तःकरणमें श्रीभगवान्को स्थापित करके देहाभिमानको त्याग देगा॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 303) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/14/47/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#260 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् को → श्रीभगवान्को