श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.15.2

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

लोके तेन हतालोके१ लोकपाला हतौजसः।

न्यवेदयन् विश्‍वसृजे ध्वान्तव्यतिकरं दिशाम्॥ २

loke tena hatāloke lokapālā hataujasaḥ|

nyavedayan viśvasṛje dhvāntavyatikaraṃ diśām|| 2

अर्थ

उस गर्भस्थ तेजसे ही लोकोंमें सूर्यादिका प्रकाश क्षीण होने लगा तथा इन्द्रादि लोकपाल भी तेजोहीन हो गये। तब उन्होंने ब्रह्माजीके पास जाकर कहा कि सब दिशाओंमें अन्धकारके कारण बड़ी अव्यवस्था हो रही है॥ २॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—कृतालोके।

    (मुद्रित पृष्ठ 304)

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