उस गर्भस्थ तेजसे ही लोकोंमें सूर्यादिका प्रकाश क्षीण होने लगा तथा इन्द्रादि लोकपाल भी तेजोहीन हो गये। तब उन्होंने ब्रह्माजीके पास जाकर कहा कि सब दिशाओंमें अन्धकारके कारण बड़ी अव्यवस्था हो रही है॥ २॥
लोके तेन हतालोके लोकपाला हतौजसः।
न्यवेदयन् विश्वसृजे ध्वान्तव्यतिकरं दिशाम्॥ २
उस गर्भस्थ तेजसे ही लोकोंमें सूर्यादिका प्रकाश क्षीण होने लगा तथा इन्द्रादि लोकपाल भी तेजोहीन हो गये। तब उन्होंने ब्रह्माजीके पास जाकर कहा कि सब दिशाओंमें अन्धकारके कारण बड़ी अव्यवस्था हो रही है॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.15.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 304) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/15/2/