॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.16.10
ये मे तनूर्द्विजवरान्दुहतीर्मदीया
भूतान्यलब्धशरणानि च भेदबुद्ध्या।
द्रक्ष्यन्त्यघक्षतदृशो ह्यहिमन्यवस्तान्
गृध्रा रुषा मम कुषन्त्यधिदण्डनेतुः॥ १०
ye me tanūrdvijavarānduhatīrmadīyā
bhūtānyalabdhaśaraṇāni ca bhedabuddhyā|
drakṣyantyaghakṣatadṛśo hyahimanyavastān
gṛdhrā ruṣā mama kuṣantyadhidaṇḍanetuḥ|| 10
अर्थ
ब्राह्मण, दूध देनेवाली गौएँ और अनाथ प्राणी—ये मेरे ही शरीर हैं। पापोंके द्वारा विवेकदृष्टि नष्ट हो जानेके कारण जो लोग इन्हें मुझसे भिन्न समझते हैं, उन्हें मेरे द्वारा नियुक्त यमराजके गृध्र-जैसे दूत—जो सर्पके समान क्रोधी हैं—अत्यन्त क्रोधित होकर अपनी चोंचोंसे नोचते हैं॥ १०॥✎ 1309