श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.16.12

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तन्मे स्वभर्तुरवसायमलक्षमाणौ

युष्मद‍्व्यतिक्रमगतिं प्रतिपद्य सद्यः।

भूयो ममान्तिकमितां तदनुग्रहो मे

यत्कल्पतामचिरतो भृतयोर्विवासः॥ १२

tanme svabharturavasāyamalakṣamāṇau

yuṣmadvyatikramagatiṃ pratipadya sadyaḥ|

bhūyo mamāntikamitāṃ tadanugraho me

yatkalpatāmacirato bhṛtayorvivāsaḥ|| 12

अर्थ

मेरे इन सेवकोंने मेरा अभिप्राय न समझकर ही आपलोगोंका अपमान किया है। इसलिये मेरे अनुरोधसे आप केवल इतनी कृपा कीजिये कि इनका यह निर्वासनकाल शीघ्र ही समाप्त हो जाय, ये अपने अपराधके अनुरूप अधम गतिको भोगकर शीघ्र ही मेरे पास लौट आयें॥ १२॥✎ 1309

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1309 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): प्रसन्‍न-चित्तसे → प्रसन्‍नचित्तसे

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