brahmaṇyasya paraṃ daivaṃ brāhmaṇāḥ kila te prabho|
viprāṇāṃ devadevānāṃ bhagavānātmadaivatam|| 17
अर्थ
प्रभो! आप ब्राह्मणोंके परम हितकारी हैं; इससे लोकशिक्षाके लिये आप भले ही ऐसा मानें कि ब्राह्मण मेरे आराध्यदेव हैं। वस्तुतः तो ब्राह्मण तथा देवताओंके भी देवता ब्रह्मादिके भी आप ही आत्मा और आराध्यदेव हैं॥ १७॥
ब्रह्मण्यस्य परं दैवं ब्राह्मणाः किल ते प्रभो।
विप्राणां देवदेवानां भगवानात्मदैवतम्॥ १७
प्रभो! आप ब्राह्मणोंके परम हितकारी हैं; इससे लोकशिक्षाके लिये आप भले ही ऐसा मानें कि ब्राह्मण मेरे आराध्यदेव हैं। वस्तुतः तो ब्राह्मण तथा देवताओंके भी देवता ब्रह्मादिके भी आप ही आत्मा और आराध्यदेव हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.16.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 314) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/16/17/