brahmatejaḥ samartho'pi hantuṃ necche mataṃ tu me|| 29
अर्थ
फिर भगवान्ने अपने अनुचरोंसे कहा, ‘जाओ, मनमें किसी प्रकारका भय मत करो; तुम्हारा कल्याण होगा। मैं सब कुछ करनेमें समर्थ होकर भी ब्रह्मतेजको मिटाना नहीं चाहता; क्योंकि ऐसा ही मुझे अभिमत भी है॥ २९॥✎ 270271
भगवाननुगावाह यातं मा भैष्टमस्तु शम्।
ब्रह्मतेजः समर्थोऽपि हन्तुं नेच्छे मतं तु मे॥ २९
फिर भगवान्ने अपने अनुचरोंसे कहा, ‘जाओ, मनमें किसी प्रकारका भय मत करो; तुम्हारा कल्याण होगा। मैं सब कुछ करनेमें समर्थ होकर भी ब्रह्मतेजको मिटाना नहीं चाहता; क्योंकि ऐसा ही मुझे अभिमत भी है॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.16.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 316) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/16/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)