जहाँ-तहाँ कुत्ते अपनी गरदन ऊपर उठाकर कभी गाने और कभी रोनेके समान भाँति-भाँतिके शब्द करने लगे॥ १०॥
संगीतवद्रोदनवदुन्नमय्य शिरोधराम्।
व्यमुञ्चन् विविधा वाचो ग्रामसिंहास्ततस्ततः॥ १०
जहाँ-तहाँ कुत्ते अपनी गरदन ऊपर उठाकर कभी गाने और कभी रोनेके समान भाँति-भाँतिके शब्द करने लगे॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.17.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 318) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/17/10/