श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.17.15

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

दृष्ट्वान्यांश्‍च महोत्पातानतत्तत्त्वविदः प्रजाः।

ब्रह्मपुत्रानृते भीता मेनिरे विश्‍वसम्प्लवम्॥ १५

dṛṣṭvānyāṃśca mahotpātānatattattvavidaḥ prajāḥ|

brahmaputrānṛte bhītā menire viśvasamplavam|| 15

अर्थ

ऐसे ही और भी अनेकों भयंकर उत्पात देखकर सनकादिके सिवा और सब जीव भयभीत हो गये तथा उन उत्पातोंका मर्म न जाननेके कारण उन्होंने यही समझा कि अब संसारका प्रलय होनेवाला है॥ १५॥

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