॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.17.18
प्रजापतिर्नाम तयोरकार्षीद्
यः प्राक् स्वदेहाद्यमयोरजायत।
तं वै हिरण्यकशिपुं विदुः प्रजा
यं तं हिरण्याक्षमसूत साग्रतः॥ १८
prajāpatirnāma tayorakārṣīd
yaḥ prāk svadehādyamayorajāyata|
taṃ vai hiraṇyakaśipuṃ viduḥ prajā
yaṃ taṃ hiraṇyākṣamasūta sāgrataḥ|| 18
अर्थ
वे दोनों यमज थे। प्रजापति कश्यपजीने उनका नामकरण किया। उनमेंसे जो उनके वीर्यसे दितिके गर्भमें पहले स्थापित हुआ था, उसका नाम हिरण्यकशिपु रखा और जो दितिके उदरसे पहले निकला, वह हिरण्याक्षके नामसे विख्यात हुआ॥ १८॥