श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.17.25

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तस्मिन् प्रविष्टे वरुणस्य सैनिका

यादोगणाः सन्‍नधियः ससाध्वसाः।

अहन्यमाना अपि तस्य वर्चसा

प्रधर्षिता दूरतरं प्रदुद्रुवुः॥ २५

tasmin praviṣṭe varuṇasya sainikā

yādogaṇāḥ sannadhiyaḥ sasādhvasāḥ|

ahanyamānā api tasya varcasā

pradharṣitā dūrataraṃ pradudruvuḥ|| 25

अर्थ

ज्यों ही उसने समुद्रमें पैर रखा कि डरके मारे वरुणके सैनिक जलचर जीव हकबका गये और किसी प्रकारकी छेड़छाड़ न करनेपर भी वे उसकी धाकसे ही घबराकर बहुत दूर भाग गये॥ २५॥

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