श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.18.24

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

मैनं मायाविनं दृप्तं निरङ्कुशमसत्तमम्।

आक्रीड बालवद्देव यथाऽऽशीविषमुत्थितम्॥ २४

mainaṃ māyāvinaṃ dṛptaṃ niraṅkuśamasattamam|

ākrīḍa bālavaddeva yathā''śīviṣamutthitam|| 24

अर्थ

यह दुष्ट बड़ा ही मायावी, घमण्डी और निरंकुश है। बच्चा जिस प्रकार क्रुद्ध हुए साँपसे खेलता है; वैसे ही आप इससे खिलवाड़ न करें॥ २४॥

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