यह दुष्ट बड़ा ही मायावी, घमण्डी और निरंकुश है। बच्चा जिस प्रकार क्रुद्ध हुए साँपसे खेलता है; वैसे ही आप इससे खिलवाड़ न करें॥ २४॥
मैनं मायाविनं दृप्तं निरङ्कुशमसत्तमम्।
आक्रीड बालवद्देव यथाऽऽशीविषमुत्थितम्॥ २४
यह दुष्ट बड़ा ही मायावी, घमण्डी और निरंकुश है। बच्चा जिस प्रकार क्रुद्ध हुए साँपसे खेलता है; वैसे ही आप इससे खिलवाड़ न करें॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.18.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 324) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/18/24/