प्रभो! देखिये, लोकोंका संहार करनेवाली सन्ध्याकी भयंकर वेला आना ही चाहती है। सर्वात्मन्! आप उससे पहले ही इस असुरको मारकर देवताओंको विजय प्रदान कीजिये॥ २६॥
एषा घोरतमा सन्ध्या लोकच्छम्बट्करी प्रभो।
उपसर्पति सर्वात्मन् सुराणां जयमावह॥ २६
प्रभो! देखिये, लोकोंका संहार करनेवाली सन्ध्याकी भयंकर वेला आना ही चाहती है। सर्वात्मन्! आप उससे पहले ही इस असुरको मारकर देवताओंको विजय प्रदान कीजिये॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.18.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 324) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/18/26/