श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.2.29

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

स एव गोधनं लक्ष्म्या निकेतं सितगोवृषम्।

चारयन्‍ननुगान् गोपान् रणद्वेणुररीरमत्॥ २९

sa eva godhanaṃ lakṣmyā niketaṃ sitagovṛṣam|

cārayannanugān gopān raṇadveṇurarīramat|| 29

अर्थ

फिर कुछ बड़े होनेपर वे सफेद बैल और रंग-बिरंगी शोभाकी मूर्ति गौओंको चराते हुए अपने साथी गोपोंको बाँसुरी बजा-बजाकर रिझाने लगे॥ २९॥✎ 197 198 199

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #197 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #198 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #199 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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