वह अण्ड चेतनाशून्य अवस्थामें एक हजार वर्षोंसे भी अधिक समयतक कारणाब्धिके जलमें पड़ा रहा। फिर उसमें श्रीभगवान्ने प्रवेश किया॥ १५॥✎ 293294295
सोऽशयिष्टाब्धिसलिले आण्डकोशो निरात्मकः।
साग्रं वै वर्षसाहस्रमन्ववात्सीत्तमीश्वरः॥ १५
वह अण्ड चेतनाशून्य अवस्थामें एक हजार वर्षोंसे भी अधिक समयतक कारणाब्धिके जलमें पड़ा रहा। फिर उसमें श्रीभगवान्ने प्रवेश किया॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 330) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/20/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#293 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने