श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.45

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

स किन्‍नरान् किम्पुरुषान् प्रत्यात्म्येनासृजत्प्रभुः।

मानयन्‍नात्मनाऽऽत्मानमात्माभासं विलोकयन्॥ ४५

sa kinnarān kimpuruṣān pratyātmyenāsṛjatprabhuḥ|

mānayannātmanā''tmānamātmābhāsaṃ vilokayan|| 45

अर्थ

एक बार ब्रह्माजीने अपना प्रतिबिम्ब देखा। तब अपनेको बहुत सुन्दर मानकर उस प्रतिबिम्बसे किन्‍नर और किम्पुरुष उत्पन्‍न किये॥ ४५॥

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