श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.7

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

एवमुग्रश्रवाः पृष्ट ऋषिभिर्नैमिषायनैः।

भगवत्यर्पिताध्यात्मस्तानाह श्रूयतामिति॥ ७

evamugraśravāḥ pṛṣṭa ṛṣibhirnaimiṣāyanaiḥ|

bhagavatyarpitādhyātmastānāha śrūyatāmiti|| 7

अर्थ

नैमिषारण्यवासी मुनियोंके इस प्रकार पूछनेपर उग्रश्रवा सूतजीने भगवान्‌में चित्त लगाकर उनसे कहा—‘सुनिये’॥ ७॥ ✎ 292

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #292 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में

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