श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.16

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

प्रजापतेस्ते वचसाधीश तन्त्या

लोकः किलायं कामहतोऽनुबद्धः।

अहं च लोकानुगतो वहामि

बलिं च शुक्लानिमिषाय तुभ्यम्॥ १६

prajāpateste vacasādhīśa tantyā

lokaḥ kilāyaṃ kāmahato'nubaddhaḥ|

ahaṃ ca lokānugato vahāmi

baliṃ ca śuklānimiṣāya tubhyam|| 16

अर्थ

सर्वेश्‍वर! आप सम्पूर्ण लोकोंके अधिपति हैं। नाना प्रकारकी कामनाओंमें फँसा हुआ यह लोक आपकी वेद-वाणीरूप डोरीमें बँधा है। धर्ममूर्ते! उसीका अनुगमन करता हुआ मैं भी कालरूप आपको आज्ञापालनरूप पूजोपहारादि समर्पित करता हूँ॥ १६॥

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