श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.37

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

तस्मिन् सुधन्वन्‍नहनि भगवान् यत्समादिशत्।

उपायादाश्रमपदं मुनेः शान्तव्रतस्य तत्॥ ३७

tasmin sudhanvannahani bhagavān yatsamādiśat|

upāyādāśramapadaṃ muneḥ śāntavratasya tat|| 37

अर्थ

वीरवर! इधर मनुजी भी महारानी शतरूपाके साथ सुवर्णजटित रथपर सवार होकर तथा उसपर अपनी कन्याको भी बिठाकर पृथ्वीपर विचरते हुए, जो दिन भगवान्‌ने बताया था, उसी दिन शान्तिपरायण महर्षि कर्दमके उस आश्रमपर पहुँचे॥ ३६-३७॥✎ 301

यह अर्थ श्लोक 36–37 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #301 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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