श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.7

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

ततः समाधियुक्तेन क्रियायोगेन कर्दमः।

सम्प्रपेदे हरिं भक्‍त्या प्रपन्‍नवरदाशुषम्॥ ७

tataḥ samādhiyuktena kriyāyogena kardamaḥ|

samprapede hariṃ bhaktyā prapannavaradāśuṣam|| 7

अर्थ

वे एकाग्रचित्तसे प्रेमपूर्वक पूजनोपचारद्वारा शरणागतवरदायक श्रीहरिकी आराधना करने लगे॥ ७॥

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