भगवान्की वह भव्य मूर्ति सूर्यके समान तेजोमयी थी। वे गलेमें श्वेत कमल और कुमुदके फूलोंकी माला धारण किये हुए थे, मुखकमल नीली और चिकनी अलकावलीसे सुशोभित था। वे निर्मल वस्त्र धारण किये हुए थे॥ ९॥✎ 297298
स तं विरजमर्काभं सितपद्मोत्पलस्रजम्।
स्निग्धनीलालकव्रातवक्त्राब्जं विरजोऽम्बरम्॥ ९
भगवान्की वह भव्य मूर्ति सूर्यके समान तेजोमयी थी। वे गलेमें श्वेत कमल और कुमुदके फूलोंकी माला धारण किये हुए थे, मुखकमल नीली और चिकनी अलकावलीसे सुशोभित था। वे निर्मल वस्त्र धारण किये हुए थे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.21.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 335) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/21/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)