श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.29

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

बर्हिष्मती नाम पुरी सर्वसम्पत्समन्विता।

न्यपतन् यत्र रोमाणि यज्ञस्यांगं विधुन्वतः॥ २९

barhiṣmatī nāma purī sarvasampatsamanvitā|

nyapatan yatra romāṇi yajñasyāṃgaṃ vidhunvataḥ|| 29

अर्थ

सब प्रकारकी सम्पदाओंसे युक्त बर्हिष्मती नगरी मनुजीकी राजधानी थी, जहाँ पृथ्वीको रसातलसे ले आनेके पश्चात् शरीर कँपाते समय श्रीवराहभगवान्‌के रोम झड़कर गिरे थे॥ २९॥✎ 304 305

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #304 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीयज्ञभगवान् की → श्रीयज्ञभगवान्‌की
  • #305 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीवराहभगवान् से → श्रीवराहभगवान्‌से

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