सब प्रकारकी सम्पदाओंसे युक्त बर्हिष्मती नगरी मनुजीकी राजधानी थी, जहाँ पृथ्वीको रसातलसे ले आनेके पश्चात् शरीर कँपाते समय श्रीवराहभगवान्के रोम झड़कर गिरे थे॥ २९॥✎ 304305
बर्हिष्मती नाम पुरी सर्वसम्पत्समन्विता।
न्यपतन् यत्र रोमाणि यज्ञस्यांगं विधुन्वतः॥ २९
सब प्रकारकी सम्पदाओंसे युक्त बर्हिष्मती नगरी मनुजीकी राजधानी थी, जहाँ पृथ्वीको रसातलसे ले आनेके पश्चात् शरीर कँपाते समय श्रीवराहभगवान्के रोम झड़कर गिरे थे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.22.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 344) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/22/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#304 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीयज्ञभगवान् की → श्रीयज्ञभगवान्की
#305 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीवराहभगवान् से → श्रीवराहभगवान्से