श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.32

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

बर्हिष्मतीं नाम विभुर्यां निर्विश्य समावसत्।

तस्यां प्रविष्टो भवनं तापत्रयविनाशनम्॥ ३२

barhiṣmatīṃ nāma vibhuryāṃ nirviśya samāvasat|

tasyāṃ praviṣṭo bhavanaṃ tāpatrayavināśanam|| 32

अर्थ

जिस बर्हिष्मती पुरीमें मनुजी निवास करते थे, उसमें पहुँचकर उन्होंने अपने त्रितापनाशक भवनमें प्रवेश किया॥ ३२॥

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