एकके ऊपर एक बनाये हुए कमरोंमें अलग-अलग रखी हुई शय्या, पलंग, पंखे और आसनोंके कारण वह बड़ा सुन्दर जान पड़ता था॥ १६॥
उपर्युपरि विन्यस्तनिलयेषु पृथक्पृथक्।
क्षिप्तैः कशिपुभिः कान्तं पर्यङ्कव्यजनासनैः॥ १६
एकके ऊपर एक बनाये हुए कमरोंमें अलग-अलग रखी हुई शय्या, पलंग, पंखे और आसनोंके कारण वह बड़ा सुन्दर जान पड़ता था॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 347) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/23/16/