फिर उन्होंने ये बहुत मूल्यके बड़े सुन्दर और कान्तिमान् आभूषण, सर्वगुणसम्पन्न भोजन और पीनेके लिये अमृतके समान स्वादिष्ट आसव प्रस्तुत किये॥ २९॥
भूषणानि परार्घ्यानि वरीयांसि द्युमन्ति च।
अन्नं सर्वगुणोपेतं पानं चैवामृतासवम्॥ २९
फिर उन्होंने ये बहुत मूल्यके बड़े सुन्दर और कान्तिमान् आभूषण, सर्वगुणसम्पन्न भोजन और पीनेके लिये अमृतके समान स्वादिष्ट आसव प्रस्तुत किये॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 348) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/23/29/