श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.23.40

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

वैश्रम्भके सुरसने नन्दने पुष्पभद्रके।

मानसे चैत्ररथ्ये च स रेमे रामया रतः॥ ४०

vaiśrambhake surasane nandane puṣpabhadrake|

mānase caitrarathye ca sa reme rāmayā rataḥ|| 40

अर्थ

इसी प्रकार प्राणप्रिया देवहूतिके साथ उन्होंने वैश्रम्भक, सुरसन, नन्दन, पुष्पभद्र और चैत्ररथ आदि अनेकों देवोद्यानों तथा मानस-सरोवरमें अनुरागपूर्वक विहार किया॥ ४०॥

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