श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.11

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

सभाजयन् विशुद्धेन चेतसा तच्चिकीर्षितम्।

प्रहृष्यमाणैरसुभिः कर्दमं चेदमभ्यधात्॥ ११

sabhājayan viśuddhena cetasā taccikīrṣitam|

prahṛṣyamāṇairasubhiḥ kardamaṃ cedamabhyadhāt|| 11

अर्थ

अतः भगवान् जिस कार्यको करना चाहते थे, उसका उन्होंने विशुद्ध चित्तसे अनुमोदन एवं आदर किया और अपनी सम्पूर्ण इन्द्रियोंसे प्रसन्‍नता प्रकट करते हुए कर्दमजीसे इस प्रकार कहा॥ ११॥

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