श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.23

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

पुलहाय गतिं युक्तां क्रतवे च क्रियां सतीम्।

ख्यातिं च भृगवेऽयच्छद्वसिष्ठायाप्यरुन्धतीम्॥ २३

pulahāya gatiṃ yuktāṃ kratave ca kriyāṃ satīm|

khyātiṃ ca bhṛgave'yacchadvasiṣṭhāyāpyarundhatīm|| 23

अर्थ

पुलहको उनके अनुरूप गति नामकी कन्या दी, क्रतुके साथ परम साध्वी क्रियाका विवाह किया, भृगुजीको ख्याति और वसिष्ठजीको अरुन्धती समर्पित की॥ २३॥

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