श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.29

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स एव भगवानद्य हेलनं नगणय्य नः।

गृहेषु जातो ग्राम्याणां यः स्वानां पक्षपोषणः॥ २९

sa eva bhagavānadya helanaṃ nagaṇayya naḥ|

gṛheṣu jāto grāmyāṇāṃ yaḥ svānāṃ pakṣapoṣaṇaḥ|| 29

अर्थ

किन्तु जिनके स्वरूपको योगिजन अनेकों जन्मोंके साधनसे सिद्ध हुई सुदृढ़ समाधिके द्वारा एकान्तमें देखनेका प्रयत्न करते हैं, अपने भक्तोंकी रक्षा करनेवाले वे ही श्रीहरि हम विषयलोलुपोंके द्वारा होनेवाली अपनी अवज्ञाका कुछ भी विचार न कर आज हमारे घर अवतीर्ण हुए हैं॥ २८-२९॥

यह अर्थ श्लोक 28–29 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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