॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.24.31
तान्येव तेऽभिरूपाणि रूपाणि भगवंस्तव।
यानि यानि च रोचन्ते स्वजनानामरूपिणः॥ ३१
tānyeva te'bhirūpāṇi rūpāṇi bhagavaṃstava|
yāni yāni ca rocante svajanānāmarūpiṇaḥ|| 31
अर्थ
भगवन्! आप प्राकृतरूपसे रहित हैं, आपके जो चतुर्भुज आदि अलौकिक रूप हैं वे ही आपके योग्य हैं तथा जो मनुष्य-सदृश रूप आपके भक्तोंको प्रिय लगते हैं, वे भी आपको रुचिकर प्रतीत होते हैं॥ ३१॥