भगवान् कपिलने कहा—माता! यह मेरा निश्चय है कि अध्यात्मयोग ही मनुष्योंके आत्यन्तिक कल्याणका मुख्य साधन है, जहाँ दुःख और सुखकी सर्वथा निवृत्ति हो जाती है॥ १३॥
योग आध्यात्मिकः पुंसां मतो निःश्रेयसाय मे।
अत्यन्तोपरतिर्यत्र दुःखस्य च सुखस्य च॥ १३
भगवान् कपिलने कहा—माता! यह मेरा निश्चय है कि अध्यात्मयोग ही मनुष्योंके आत्यन्तिक कल्याणका मुख्य साधन है, जहाँ दुःख और सुखकी सर्वथा निवृत्ति हो जाती है॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 358) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/13/