saṃgasteṣvatha te prārthyaḥ saṃgadoṣaharā hi te|| 24
अर्थ
साध्वि! ऐसे-ऐसे सर्वसंगपरित्यागी महापुरुष ही साधु होते हैं, तुम्हें उन्हींके संगकी इच्छा करनी चाहिये; क्योंकि वे आसक्तिसे उत्पन्न सभी दोषोंको हर लेनेवाले हैं॥ २४॥
त एते साधवः साध्वि सर्वसंगविवर्जिताः।
संगस्तेष्वथ ते प्रार्थ्यः संगदोषहरा हि ते॥ २४
साध्वि! ऐसे-ऐसे सर्वसंगपरित्यागी महापुरुष ही साधु होते हैं, तुम्हें उन्हींके संगकी इच्छा करनी चाहिये; क्योंकि वे आसक्तिसे उत्पन्न सभी दोषोंको हर लेनेवाले हैं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 359) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/24/