श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.25.6

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

तमासीनमकर्माणं तत्त्वमार्गाग्रदर्शनम्।

स्वसुतं देवहूत्याह धातुः संस्मरती वचः॥ ६

tamāsīnamakarmāṇaṃ tattvamārgāgradarśanam|

svasutaṃ devahūtyāha dhātuḥ saṃsmaratī vacaḥ|| 6

अर्थ

एक दिन तत्त्वसमूहके पारदर्शी भगवान् कपिल कर्मकलापसे विरत हो आसनपर विराजमान थे। उस समय ब्रह्माजीके वचनोंका स्मरण करके देवहूतिने उनसे कहा॥ ६॥

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