श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.25.8

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

तस्य त्वं तमसोऽन्धस्य दुष्पारस्याद्य पारगम्।

सच्चक्षुर्जन्मनामन्ते लब्धं मे त्वदनुग्रहात्॥ ८

tasya tvaṃ tamaso'ndhasya duṣpārasyādya pāragam|

saccakṣurjanmanāmante labdhaṃ me tvadanugrahāt|| 8

अर्थ

अब आपकी कृपासे मेरी जन्मपरम्परा समाप्त हो चुकी है, इसीसे इस दुस्तर अज्ञानान्धकारसे पार लगानेके लिये सुन्दर नेत्ररूप आप प्राप्त हुए हैं॥ ८॥

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