श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.13

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

इन्द्रियाणि दश श्रोत्रं त्वग्दृग्रसननासिकाः।

वाक्करौ चरणौ मेढ्रं पायुर्दशम उच्यते॥ १३

indriyāṇi daśa śrotraṃ tvagdṛgrasananāsikāḥ|

vākkarau caraṇau meḍhraṃ pāyurdaśama ucyate|| 13

अर्थ

श्रोत्र, त्वचा, चक्षु, रसना, नासिका, वाक्, पाणि, पाद, उपस्थ और पायु—ये दस इन्द्रियाँ हैं॥ १३॥✎ 318

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #318 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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