किन्तु जब चित्तके अधिष्ठाता क्षेत्रज्ञने चित्तके सहित हृदयमें प्रवेश किया, तो विराट् पुरुष उसी समय जलसे उठकर खड़ा हो गया॥ ७०॥
चित्तेन हृदयं चैत्यः क्षेत्रज्ञः प्राविशद्यदा।
विराट् तदैव पुरुषः सलिलादुदतिष्ठत॥ ७०
किन्तु जब चित्तके अधिष्ठाता क्षेत्रज्ञने चित्तके सहित हृदयमें प्रवेश किया, तो विराट् पुरुष उसी समय जलसे उठकर खड़ा हो गया॥ ७०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.26.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 369) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/26/70/