श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

देवहूतिरुवाच

प्रकृतेः पुरुषस्यापि लक्षणं पुरुषोत्तम।

ब्रूहि कारणयोरस्य सदसच्च यदात्मकम्॥ ९

prakṛteḥ puruṣasyāpi lakṣaṇaṃ puruṣottama|

brūhi kāraṇayorasya sadasacca yadātmakam|| 9

अर्थ

देवहूतिने कहा—पुरुषोत्तम! इस विश्‍वके स्थूल-सूक्ष्म कार्य जिनके स्वरूप हैं तथा जो इसके कारण हैं उन प्रकृति और पुरुषका लक्षण भी आप मुझसे कहिये॥ ९॥

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