neśvarasyāśubhaṃ dhatte sve mahimni sthitasya ca|| 24
अर्थ
फिर नित्यप्रति दोष दीखनेसे भोगकर त्यागी हुई वह प्रकृति अपने स्वरूपमें स्थित और स्वतन्त्र (बन्धनमुक्त) हुए उस पुरुषका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती॥ २४॥✎ 3231597
भुक्तभोगा परित्यक्ता दृष्टदोषा च नित्यशः।
नेश्वरस्याशुभं धत्ते स्वे महिम्नि स्थितस्य च॥ २४
फिर नित्यप्रति दोष दीखनेसे भोगकर त्यागी हुई वह प्रकृति अपने स्वरूपमें स्थित और स्वतन्त्र (बन्धनमुक्त) हुए उस पुरुषका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.27.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 372) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/27/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#323 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने