कमरमें करधनीकी लड़ियाँ उसकी शोभा बढ़ा रही हैं; भक्तोंके हृदयकमल ही उनके आसन हैं, उनका दर्शनीय श्यामसुन्दर स्वरूप अत्यन्त शान्त एवं मन और नयनोंको आनन्दित करनेवाला है॥ १६॥✎ 327
कांचीगुणोल्लसच्छ्रोणिं हृदयाम्भोजविष्टरम्।
दर्शनीयतमं शान्तं मनोनयनवर्धनम्॥ १६
कमरमें करधनीकी लड़ियाँ उसकी शोभा बढ़ा रही हैं; भक्तोंके हृदयकमल ही उनके आसन हैं, उनका दर्शनीय श्यामसुन्दर स्वरूप अत्यन्त शान्त एवं मन और नयनोंको आनन्दित करनेवाला है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.28.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 375) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/28/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)