जो व्यक्ति आत्मा और परमात्माके बीचमें थोड़ा-सा भी अन्तर करता है, उस भेददर्शीको मैं मृत्युरूपसे महान् भय उपस्थित करता हूँ॥ २६॥
आत्मनश्च परस्यापि यः करोत्यन्तरोदरम्।
तस्य भिन्नदृशो मृत्युर्विदधे भयमुल्बणम्॥ २६
जो व्यक्ति आत्मा और परमात्माके बीचमें थोड़ा-सा भी अन्तर करता है, उस भेददर्शीको मैं मृत्युरूपसे महान् भय उपस्थित करता हूँ॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.29.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 382) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/29/26/