श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.31

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

ततो वर्णाश्‍च चत्वारस्तेषां ब्राह्मण उत्तमः।

ब्राह्मणेष्वपि वेदज्ञो ह्यर्थज्ञोऽभ्यधिकस्ततः॥ ३१

tato varṇāśca catvārasteṣāṃ brāhmaṇa uttamaḥ|

brāhmaṇeṣvapi vedajño hyarthajño'bhyadhikastataḥ|| 31

अर्थ

मनुष्योंमें भी चार वर्ण श्रेष्ठ हैं; उनमें भी ब्राह्मण श्रेष्ठ है। ब्राह्मणोंमें वेदको जाननेवाले उत्तम हैं और वेदज्ञोंमें भी वेदका तात्पर्य जाननेवाले श्रेष्ठ हैं॥ ३१॥

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