श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.44

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

गुणाभिमानिनो देवाः सर्गादिष्वस्य यद्भयात्।

वर्तन्तेऽनुयुगं येषां वश एतच्चराचरम्॥ ४४

guṇābhimānino devāḥ sargādiṣvasya yadbhayāt|

vartante'nuyugaṃ yeṣāṃ vaśa etaccarācaram|| 44

अर्थ

इस कालके ही भयसे सत्त्वादि गुणोंके नियामक विष्णु आदि देवगण, जिनके अधीन यह सारा चराचर जगत् है, अपने जगत्-रचना आदि कार्योंमें युगक्रमसे तत्पर रहते हैं॥ ४४॥

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